ला ला ला ला ला ला ला ...... आह हा आह हा हा हा .........
हर इक मुस्कराहट मुस्कान नहीं होती
नफरत हो या मोहब्बत आसन नहीं होती
आंसू ख़ुशी के ग़म के होते है इक जैसे - (2)
इन आंसुओ कि कोई पहचान नहीं होती
हाँ, हर इक मुस्कराहट मुस्कान नहीं होती
नफरत हो या मोहब्बत, आसन नहीं होती
हर बात है वही पर मतलब बादल गए है
दिल डगमगा गया था, पर हम संभल गए है
ऐसे भी आते है दिन, जीते है लोग लेकिन - (2)
होता है और सब कुछ, पर जन नहीं होती
हाँ , हर इक मुस्कराहट मुस्कान नहीं होती
नफरत हो या मोहब्बत , आसन नहीं होती
ला ला ला ला ला ला ला ...... आह हा आह हा हा हा .........
होते है इस जहाँ में चेहरे भी इक जैसे
घूँघट भी इक जैसे , सेहरे भी इक जैसे
सब जानती है नज़रें , पहचानती है नज़रें - (2)
अपनी परायी सूरत अंजन नहीं होती
हा हर इक मुस्कराहट मुस्कान नहीं होती
नफरत हो या मोहब्बत , आसन नहीं होती
क्या चीज़ है यह दिल भी , हो जाये जब अकेला
रहता है साथ इसके यादों का इक मेला
दुनिया भी छुट जाये , हर आस टूट जाये - (2)
महफ़िल कभी यह दिल कि वीरान नहीं होती
आंसू ख़ुशी के ग़म के , होते है इक जैसे - (2)
इन आंसुओ कि कोई पहचान नहीं होती
हाँ हर इक मुस्कराहट मुस्कान नहीं होती
नफरत हो या मोहब्बत , आसन नहीं होती
. . . . . . . आन्नद बख्शी !!!
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